तमिलनाडू

मेट्टूर बांध की ईस्ट-वेस्ट नहर से सिंचाई के लिए पानी नहीं छोड़े जाने से किसान चिंतित

Kavita2
1 Aug 2026 9:08 AM IST
मेट्टूर बांध की ईस्ट-वेस्ट नहर से सिंचाई के लिए पानी नहीं छोड़े जाने से किसान चिंतित
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सलेम (तमिलनाडु) । तमिलनाडु के किसानों के लिए हर वर्ष 1 अगस्त का दिन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसी दिन परंपरागत रूप से मेट्टूर बांध की ईस्ट-वेस्ट नहरों से सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाता है। लेकिन इस वर्ष किसानों की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। 1 अगस्त को मेट्टूर बांध की ईस्ट-वेस्ट नहरों से सिंचाई के लिए पानी नहीं छोड़ा गया। इसका प्रमुख कारण बांध में पानी का पर्याप्त भंडारण और जल की आवक संतोषजनक स्तर पर नहीं होना बताया गया है।

पानी नहीं छोड़े जाने की खबर से सलेम, नमक्कल और इरोड जिलों के हजारों किसान चिंतित हैं। इन जिलों की बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है और उनकी खेती मेट्टूर बांध की ईस्ट-वेस्ट नहर प्रणाली से मिलने वाले सिंचाई जल पर आधारित है। ऐसे में पानी की आपूर्ति में देरी का सीधा असर खरीफ सीजन की फसलों पर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

मेट्टूर बांध की ईस्ट-वेस्ट नहरों के माध्यम से लगभग 45 हजार एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई होती है। इनमें ईस्ट बैंक नहर लगभग 27 हजार एकड़ और वेस्ट बैंक नहर लगभग 18 हजार एकड़ क्षेत्र को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराती है। यह नहर प्रणाली दशकों से किसानों के लिए जीवनरेखा का काम करती रही है और क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार मानी जाती है।

जानकारी के अनुसार, ईस्ट बैंक नहर की कुल लंबाई लगभग 40.20 मील है, जबकि वेस्ट बैंक नहर लगभग 27 मील की दूरी तय करने के बाद कावेरी नदी में जाकर मिलती है। इन दोनों नहरों के जरिए हजारों किसानों की धान, गन्ना, मक्का, सब्जियां तथा अन्य मौसमी फसलों की सिंचाई होती है।

हर वर्ष निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 1 अगस्त को नहरों में पानी छोड़ा जाता है, ताकि किसान समय पर बुवाई और अन्य कृषि कार्य शुरू कर सकें। लेकिन इस बार मेट्टूर बांध में जल भंडारण अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंचने के कारण सिंचाई जल की आपूर्ति शुरू नहीं की जा सकी। अधिकारियों का कहना है कि बांध में जल उपलब्धता और लगातार होने वाली आवक की समीक्षा के बाद ही आगे कोई निर्णय लिया जाएगा।

पानी नहीं मिलने से किसानों में चिंता बढ़ गई है। कई किसानों ने पहले ही खेतों की जुताई और बुवाई की तैयारी पूरी कर ली थी। उन्हें उम्मीद थी कि 1 अगस्त से नहरों में पानी आने के बाद खेती का काम तेजी से आगे बढ़ेगा। लेकिन सिंचाई जल उपलब्ध नहीं होने के कारण कृषि कार्य प्रभावित होने की संभावना बढ़ गई है। यदि जल्द पानी नहीं छोड़ा गया तो खरीफ फसलों की बुवाई में देरी हो सकती है, जिससे उत्पादन पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि खरीफ सीजन में समय पर सिंचाई बेहद महत्वपूर्ण होती है। शुरुआती चरण में पानी की कमी फसलों की वृद्धि को प्रभावित कर सकती है। विशेष रूप से धान जैसी अधिक पानी वाली फसलों के लिए शुरुआती सिंचाई आवश्यक मानी जाती है। इसलिए किसान अब सरकार और जल संसाधन विभाग के अगले फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

स्थानीय किसानों का कहना है कि मेट्टूर बांध की नहरों से पानी मिलने पर ही उनकी खेती सुचारु रूप से चल पाती है। ऐसे में पानी छोड़ने में देरी से न केवल कृषि कार्य प्रभावित होंगे, बल्कि उनकी आय पर भी असर पड़ सकता है। कई किसानों ने प्रशासन से जल्द स्थिति की समीक्षा कर सिंचाई के लिए पानी छोड़ने की मांग की है।

जल संसाधन विभाग के अधिकारी बांध में जलस्तर और आने वाले दिनों में संभावित वर्षा की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। यदि जल भंडारण में सुधार होता है तो सिंचाई के लिए पानी छोड़े जाने पर निर्णय लिया जा सकता है। हालांकि अभी तक इसके लिए कोई नई तिथि घोषित नहीं की गई है।

मेट्टूर बांध कावेरी बेसिन की सिंचाई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां से छोड़ा जाने वाला पानी न केवल कृषि बल्कि क्षेत्र की जलापूर्ति व्यवस्था के लिए भी अहम भूमिका निभाता है। इसलिए जल प्रबंधन के दौरान पेयजल और सिंचाई दोनों आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाता है।

फिलहाल 1 अगस्त को पानी नहीं छोड़े जाने से सलेम, नमक्कल और इरोड जिलों के हजारों किसान इंतजार की स्थिति में हैं। अब सभी की निगाहें सरकार और जल संसाधन विभाग के अगले निर्णय पर टिकी हैं। किसानों को उम्मीद है कि जैसे ही बांध में पर्याप्त जल उपलब्ध होगा, ईस्ट-वेस्ट नहरों के माध्यम से सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाएगा, जिससे उनकी फसलें सुरक्षित रह सकें और कृषि कार्य समय पर आगे बढ़ सके।

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